स्थाई लोक अदालत की जानकारी पहुंचाई घर-घर

विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने पम्पलेट बांटकर नि:शुल्क विधिक सहायता के प्रति किया जागरूक

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के एक्शन प्लान के तहत गुरुवार को टाउन स्थित नेहरू मेमोरियल विधि महाविद्यालय में स्थाई लोक अदालत के प्रति जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर हुए इस अभियान में छात्र-छात्राओं ने पोस्टर, बैनर और पम्पलेट के माध्यम से लोगों को स्थाई लोक अदालत की कार्यप्रणाली और नि:शुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी। इसके बाद विद्यार्थियों ने आसपास के क्षेत्रों में जाकर आमजन को पम्पलेट वितरित किए और कानूनी सहायता योजनाओं के बारे में अवगत कराया।

त्वरित और सरल न्याय का माध्यम

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सीताराम ने कहा कि स्थाई लोक अदालत आम नागरिकों को कम समय में सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच है। उन्होंने बताया कि बिजली, पानी, परिवहन, बीमा सहित सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निस्तारण यहां बिना किसी शुल्क के कराया जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस व्यवस्था की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।

विधिक सहायता के अधिकारों की दी जानकारी

विधिक सहायता क्लीनिक के प्रभारी एवं सहायक आचार्य डॉ. बृजेश अग्रवाल ने बताया कि स्थाई लोक अदालत की स्थापना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत की गई है। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को प्रभावी एवं नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि यहां पारित निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है तथा इसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं है।

विधिक साक्षरता बढ़ाने का आह्वान

कार्यक्रम के दौरान कानून के विद्यार्थियों को समाज में विधिक जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोगों को स्थाई लोक अदालत की व्यवस्था की जानकारी होगी तो वे लंबी और खर्चीली न्यायिक प्रक्रिया से बचते हुए समय पर न्याय प्राप्त कर सकेंगे।

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